एक उपयोगी मुख्य बात
- महाराष्ट्र सरकार के एक पैनल ने विशेष रूप से सोशल मीडिया मानहानि से निपटने के लिए **भारतीय न्याय संहिता** में राज्य स्तरीय संशोधन की सिफारिश की है।
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Gist महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित एक समिति ने सोशल मीडिया पर बदनामीकारक Defamatory पोस्ट को स्पष्ट रूप से अपराध घोषित करने के उद्देश्य से 'भारतीय न्याय संहिता' BNS में राज्य-स्तरीय संशोधन का प्रस्ताव रखा है। डिजिटल अभिव्यक्ति को विनियमित करने का यह प्रयास उन संवैधानिक कमियों को दोहराने से बचने का प्रयास करता है, जिनके आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ 2015 मामले में सूचना प्रौद्योगिकी IT अधिनियम की धारा 66A को अमान्य Unconstitutional घोषित कर दिया था। अभ्यर्थियों के लिए प्रशासनिक व संवैधानिक महत्त्व: सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए यह इस बात का एक उत्कृष्ट व्यावहारिक उदाहरण है कि कैसे राज्य सरकारें डिजिटल सामग्री के विनियमन Content Regulation तथा स्वतंत्र अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, केंद्रीय आपराधिक कानूनों में बदलाव के लिए समवर्ती सूची सातवीं अनुसूची की सूची-III का उपयोग करती हैं। Background - धारा 66ए का युग: 2015 से पहले, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए डिजिटल अभिव्यक्ति को नियंत्रित करती थी। इसके तहत कंप्यूटर संसाधनों के माध्यम से भेजे गए उन संदेशों को अपराध माना जाता था जिन्हें…
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