एक उपयोगी मुख्य बात
- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केएलईएमएस उत्पादकता डेटाबेस के अनुसार, 2014-15 और 2023-24 के बीच भारत में 17.18 करोड़ श्रमिक जुड़े हैं।
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Gist भारत का रोजगार परिदृश्य रोजगार सृजन की मात्रा की चुनौती से नौकरियों की गुणवत्ता की चुनौती में परिवर्तित हो रहा है। हालांकि आरबीआई केएलईएमएस जैसे डेटाबेस पिछले एक दशक में 17 करोड़ से अधिक श्रमिकों के जुड़ने को दर्शाते हैं, लेकिन अब ध्यान औपचारिकीकरण, वास्तविक वेतन वृद्धि और उच्च उत्पादकता की ओर जाना चाहिए। सिविल सेवा के एक उम्मीदवार के लिए, यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव को उजागर करता है: कुल रोजगार के आंकड़े अब आर्थिक स्वास्थ्य के पर्याप्त संकेतक नहीं हैं, और जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्त करने के लिए भविष्य की रणनीतियों में महिला कार्यबल की भागीदारी, सूक्ष्म उद्यमों के विस्तार और उद्योग से जुड़े कौशल विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। Background भारत के श्रम बाजार का आकलन काफी हद तक दो अलग-अलग सांख्यिकीय दृष्टिकोणों पर निर्भर करता है जिन्हें अक्सर गलत तरीके से एक साथ मिला दिया जाता है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण पीएलएफएस वर्तमान साप्ताहिक स्थिति का उपयोग करके मासिक डेटा प्रदान करता है, जो अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को पकड़ने के लिए पिछले सात दिनों के आधार पर किसी व्यक्ति की गतिविधि को वर्गीकृत करता है। इसके…
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