एक उपयोगी मुख्य बात
- बीबीसी और टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट द्वारा इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले सशुल्क विज्ञापन चलाए जाने के खुलासे के बाद एनसीपीसीआर और माइटी ने मेटा को तलब किया।
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Gist स्वतंत्र जांच में इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री सीएसईएएम को बढ़ावा देने वाले सशुल्क विज्ञापन चलाए जाने का खुलासा होने के बाद, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एनसीपीसीआर और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय माइटी ने मेटा के अधिकारियों को तलब किया है। यह हस्तक्षेप प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय समीक्षा प्रणालियों में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर करता है। एक अभ्यर्थी के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डिजिटल बाल सुरक्षा को लागू करने की चुनौतियों, मध्यवर्ती संस्थाओं के स्व-नियमन की सीमाओं और वैश्विक तकनीकी दिग्गजों को जवाबदेह ठहराने के लिए भारतीय अधिकारियों के पास उपलब्ध वैधानिक तंत्र को रेखांकित करता है। Background भारत में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री सीएसईएएम का प्रसार एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एनसीपीसीआर एक वैधानिक निकाय है जिसकी स्थापना बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत की गई है। इसका मुख्य कार्य बाल संरक्षण कानूनों के लागू न होने से संबंधित शिकायतों की जांच करना, सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करना और संकटग्रस्त बच्चों की सुरक्षा करना…
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