एक उपयोगी मुख्य बात
- सेबी ने साइबर तत्परता को मापने के लिए बाजार अवसंरचना संस्थानों के लिए 9-पैरामीटर वाला एक 'आईटी रेजिलिएंस इंडेक्स' (आईटीआरआई) पेश किया है, जो 2027 की शुरुआत से लागू होगा।
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Gist जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआई और डीपफेक प्रौद्योगिकियां वित्तीय धोखाधड़ी को बढ़ाना आसान बना रही हैं, भारत के प्रमुख वित्तीय नियामकों, आरबीआई और सेबी ने व्यापक साइबर सुरक्षा ढांचे पेश किए हैं। सेबी ने बाजार संस्थानों के लिए एक मात्रात्मक 'आईटी रेजिलिएंस इंडेक्स' आईटीआरआई लॉन्च किया है, जबकि आरबीआई ने बैंकों के लिए सख्त प्रशासन और त्वरित घटना रिपोर्टिंग को अनिवार्य कर दिया है। अभ्यर्थियों को प्रतिक्रियात्मक साइबर सुरक्षा से सक्रिय, मापने योग्य लचीलेपन की ओर इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए, जो भारत की वित्तीय प्रशासन वास्तुकला में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। Background - बाजार अवसंरचना संस्थान एमआईआई —जैसे क्लियरिंग कॉर्पोरेशन, डिपॉजिटरी और स्टॉक एक्सचेंज—प्रतिभूति बाजार की महत्वपूर्ण रीढ़ बनते हैं। यहां कोई भी प्रणालीगत व्यवधान पूरे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा पैदा करता है। - पहले, वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा काफी हद तक खंडित, घटना के बाद की रिपोर्टिंग और अमूर्त जोखिम आकलन पर निर्भर थी। - एआई के आगमन के साथ, डीपफेक-बायपास केवाईसी और स्वचालित फ़िशिंग जैसे खतरों ने पारंपरिक बचावों को पीछे छोड़ दिया है, जिससे नियामकों को मानकीकृत जीवनचक्र रिपोर्टिंग, निरंतर…
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